Asha…..

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मैं आशाराम भावसर देवलाल भावसर का सुपुत्र,  माता गेंदा भावसर । मेरा जन्म 7 जुलाई 1994 को खंडवा जिला के नंदाना गाँव में हुआ । हमारा गाँव शायद खंडवा जिला का सबसे पीछडा गाँव होगा ।

यहाँ आज भी कुछ नहीं बदला,  बदला तो सिर्फ लोगों कि उम्र । बचपन से मेरा लगाव पढ़ाई से था।  लेकिन पढ़ने की सुविधा नही थी ।क्योंकि हमारा परिवार गरीब था। मुझे बकरियां चराने जंगल जाना पड़ता था। पिता जी ,यहाँ तक की भाई – बहन भी रोजी रोटी के लिए मजदूरी करने जाते । मुझे गर्व है कि मैं एक मजदूर परिवार से हुँ ।

जहां तक मुझे याद है परिवार से  लेकर कुटुंभ तक कोई पढ़ा लिखा नहीं था । लेकिन आज में थोड़ा -सा हुं।
मेरी primary की पढ़ाई गाँव से हुई । विषयों में अच्छी पकड़ होने के कारण मेरा चयन  Jawahar Navodaya Vidyalaya  में हो गया ।

मेरी माध्यमिक और  Higher Secondary  की पढ़ाई भी  JNV  से हुई । इस बीच मेरा रुझान संगीत और खेल में अधिक था । जब मैं कक्षा नवमी में था तब मेरा चयन  भोपाल के भारत भवन मे नाटक के लिए हुआ जिसका शीर्षक था, फिरंगी लौट आएँ । अच्छा  performance के कारण मेरा चयन आगे लिए हुआ।

परंतु किसी कारणवस आगे जाने का अवसर नहीं दिया गया । इसी समय मेरा चयन जिला स्तरीय athlete in disc through में चयन हुआ परंतु मै वहाँ भी नहीं जा  सका। मुझे आज भी वो दिन याद है , ये सब आर्थिक रुप से सक्षम न होने के कारण हुआ । Navodaya Vidyalaya  मे  हर महीने के पहले रविवार को parents day होता था । इस दिन सारे बच्चों के माता -पिता अपने बच्चों से मिलने आते थे । लेकिन स्कूल दुर होने के कारण मेरे माता -पिता मुझसे मिलने नहीं आ सकते थे । इसका कारण था,आर्थिक समस्या का होना लेकिन मै खुश था । मैं यह सोच कर अपने आपको सांत्वना देता था कि कम से कम मुझे पढ़ने का अवसर तो मिल रहा हैं,  औरों को यह भी नसीब नहीं है ।

बहुत  से ऐसे मुकाम आए जब मुझे लगा, मैं समाज के लिए बना हुं ।इसिलिएमैं IAS officer बनना चाहता हुँ।शायद मुझे समाज सेवक ही बनना चाहिए । लोग कहते हैं समाज सेवा के लिए पैसे चाहिए । लेकिन मैं लोगों  की छोटी -मोटी आवश्यकता को पुरा करके खुशी महसूस करता हुँ।क्योंकि फिलहाल तो मैं इतना ही कर सकता हुँ ।

Higher Secondary Education  मैं 2 बार राष्ट्रीय खिलाड़ी के रुप  चयन हुआ । इसी बीच कप्तान  की जिम्मेदारी भी अच्छे से निभाई । Teachers के स्नेह और दुलार के कारण मुझे बहुत कम घर की याद आती थी। बचपन से मेरा सपना IAS बनने का है । क्योंकि समाज सेवा के लिए पैसा भी चाहिए । मैं जानता हुँ आज भारत देश एवं  देशवासियों को ईमानदार लोगों की  जरुरत है ।

नवोदय मे तो जीवन खुशी -खुशी गुजर गया, लेकिन जिंदगी की असली परिक्षा की घड़ी बारहवीं के बाद शुरू हुई । क्योंकि  बीना रुपयों के कुछ नही होता । 6 वी – 12 वी तक नवोदय की मेहरबानी रहीं  लेकिन अब मेरे माता -पिता आगे पढ़ाने की सोच भी नहीं सकते थे। मैं उन्हें और ज्यादा परेशान नही कर सकता था। इस बीच पढ़ाई करने के लिए मैंने मजदूरी करना शुरू कर दिया ।

आगे कि पढ़ाई के लिए  AIPMT  की exam दी,  परंतु 15  marks से रह गया । फिर सोचा drop लुँ, एक वर्ष का, परंतु जब मैने संत  सिंगाजी काॅलेज के बारे में सुना तो अपने आपको रोक न सका। सोचा यही सही समय हैं, समाज को जानने और समझने  का।क्योंकि  अभी तक मैं गाँव को ठीक तरह से समझ नही पाया था।

अब शुरुआत होती हैं मेरी ग्रेजुएशन की पढ़ाई की।कुछ शर्त के मुताबिक मेरा admission  BSc Microbiology में हो गया । इसके पीछे सारा योगदान काॅलेज के chief mentor  श्री संकल्प जी  भार्गव  का था। अब मेरा  admission हो चुका था।परंतु मेरी समस्या अभी रुकने का नाम नही ले रही थी।अब मुझे आने जाने मे समस्या थी,  तो उन्होंने  मेरी रहने की  व्यवस्था AIM for Seva नेमावर में कर दी।

अब मैं खुश था और मेरे घर वाले भी। दिन गुजर रहे थे और मैं मन लगाकर पढ़ाई कर रहा था। तभी कुछ कार्यो के कारण मेरी पढ़ाई में बाधाएँ आ रहीं तो मैंने AIM for Seva को अलविदा कह दिया। अब मैं दीदी के यहाँ यानी राजौर से काॅलेज आने लगा । लेकिन क्या करें किस्मत का मारा जाए तो जाए कहां। प्रतिदिन मैं आता तो बस से था लेकिन वापस घर पैदल आना पड़ता था।तभी ये परेशानी  हमारे HOD (राजीव सक्सेना ) को बताई तो उन्होंने सायकल खरीदने को कहा,और कहा  10 कि.मी पैदल चलने  से तो बचोगे।वो भी खरीद ली लेकिन उससे भी बात नहीं बनीं फिर क्या था, हम तो ठहरे  गाँव के  लाल पैदल चलने की आदत बना ली और यहीं रौजाना चलता।

पढ़ाई मैं तो कोई कठिनाई नहीं आई , क्योंकि संत सिंगाजी महाविद्यालय के शिक्षक मेहनती और लगनशील होने साथ -साथ Motivated and dedicated थे ।
जिस तरह मेरा पहला वर्ष बीता ठीक उसी प्रकार मेरे दो वर्ष भी बीत गए । इन तीन वर्षों ने मुझे इतना धनवान बना दिया कि, अब मुझे समाज का Development  करने में ज्यादा कठिनाई नहीं आएगी । यह अतिशियोकति नहीं सच है, जितना सिंगाजी काॅलेज बच्चों के लिए सोचता है उतना शायद और कोई नहीं ।

आज मैं graduate हो गया , और आगे पढ़ाई के लिए अज़ीम प्रेम जी विश्वविद्यालय जा रहा हुँ । यहाँ से मुझे  MA development की पढ़ाई 2  वर्ष मैं complete करना है ।इसके लिए भी मेरे शिक्षक(SSISM) Siddarth sir ने admission fee जमा की । कहा जाए तो SSISM से  वो  सारी सुविधाएँ मुझे प्राप्त हुई जो एक विद्यार्थी को होनी चाहिए ।समय पर guide line , motivation ने अहम भूमिका निभाई जिससे मेरा चयन APU के लिए हुआ । अच्छी बात तो यह है कि मुझे रसायन शास्त्र पढ़ना और पढाना अच्छा लगता है । इसके लिए कभी -कभी जुनियर की क्लास लेने का अवसर भी दिया गया।इससे मेरे दो फायदे हुए एक तो मेरा Revision  और दूसरा विषय में अच्छी पकड़ ।भले ही मैं अब दूसरे विषय मे प्रवेश लेने जा रहा हुँ परंतु रसायन शास्त्र का  भूत हमेशा रहेगा।

अब ये जिम्मेदारी मेरी है कि मैं सिंगाजी परिवार के लिए कुछ करुँ ।सिंगाजी परिवार में बच्चा आता तो खाली हाथ है , लेकिन जाता बहुत कुछ लेकर । खास बात यह है यहाँ का अनुशासन मुझे बहुत प्रीय लगा। मानता हुँ यौवाओं को ये सब अच्छा नहीं लगता परंतु जीवन के अंतिम पड़ाव पर बच्चों को सही मार्ग पर लाने का अच्छा प्रयास है।शायद समाज को अब मैने करीब से देख लिया , अब सफर होने जा रहा है बैंगलौर का । वहाँ की चकाचौंध में या तो कोई बहुत कुछ प्राप्त कर ले या फिर कंगाल ।
जाने का किराया तो फिलहाल उधार ले लिया , लेकिन बाद में क्या होगा मुझे नहीं पता । कहते हैं एक अच्छे कार्य के लिए कई हाथ आगे आते हैं । कल मैं जो भी रहुँगा  सिर्फ SSISM के कारण ।

मैं जानता हुँ गाँवो का development होना बहुत आवश्यक है। मैं मजदूर परिवार से हुँ परंतु मैं मानता हुँ मेरा हर कदम development  के लिए ही होगा । तीन  वर्ष graduation  के कैसे निकल गये पता नहीं चला।इन 3 वर्ष मैं कम से कम मैं मजदूरी करना तो सिख ही लिया । इस बीच यदि मैं कुछ बन सका तो एक- दो परिवार के लिए कुछ तो कर पाऊँगा बस यही इच्छा है।

मेरा यहीं संकल्प रहेगा जो भी ज्ञान मुझे APU से प्राप्त होगा वो समाज को समर्पित हैं ।

आशाराम भावसर
गाँव – नंदाना
जिला -खंडवा  (म .प्र .)

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